सब पागल हैं

सोनू के लिए
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मैं तो पागल हूँ , मेरे भाई .
यहाँ कोई नहीं जानता मुझे .
क्या ही बुरा है की
कोई पीछे नहीं पड़ता मेरे.
मेरा तो काम है जगे रहना ,
हवलदार की तरह , सारी रात , चौकन्ना .

चारों तरफ सन्नाटे में लिपटे
जब वो पी-पा के टुन्न होकर आते हैं ,
और बहुत देर बीत चुकी होती है ,
तब वो मुझे पहचानते हैं .
कहते हैं, सवेरा हो रहा है .

पागल कहीं के !

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~ by Bombadil on August 26, 2009.

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