A Gift for the King

For my Shi’a friends
————————————————

वली का यार हूँ फ़क़त बशीर नहीं हूँ मैं
मज़हर-ए-फ़तेह हूँ सिर्फ़ नसीर नहीं हूँ मैं

शब-ए-दीन की किस्मत में अँधेरा कभी ना हो
बनी चाँद का ख़लीफा हूँ वज़ीर नहीं हूँ मैं

डरता है क्यों मुसाफिर इस राह के पत्थर से
बाब-ए-आलम-ए-क़ल्ब हूँ जहाँगीर नहीं हूँ मैं

होकर मुझी से ही मिलना है फिर भी ज़रा लिखो 
कलम-ए-अकबर हूँ लक़ीर का फ़क़ीर नहीं हूँ मैं

कैसे न हो ज़मानों का नूर शान-ए-मोमिन अमीर
तुम ही कहो ‘सुन्दर’ क्या शेर-ए-क़बीर नहीं हूँ मैं

Advertisements

~ by Bombadil on September 28, 2009.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: